श्री त्रिमूर्तिधाम बालाजी हनुमान मंदिर

   प्रेरणात्मक विचार   


संसार तुम्हें वही देगा जो तुम उसे दोगे।

 


समय

मंदिर समय
6:00 AM to 1:00 PM
3:00 PM to 7:00 PM
 
भोजन विश्राम
मध्याह्न 1:00 - 3:00 बजे
 
उत्थापन आरती
प्रातः 6:30 -7:00
सान्ध्य आरती
सांय: 6:30 -7:00
शयन आरती
रात्रि: 7:30
 
अंजना माता
की रसोई
नाश्ता प्रातः 8:00 - 9:00 बजे
मध्याह्न भोजन: 1:00 - 2:00 बजे
रात्रि भोजन: 7:00 - 8:00 बजे

पोशाक नियम / पूजन अर्चन सूची

श्री भृगु शरण मन्त्र

ॐ आत्मवेत्ता वेदान्त सूक्ष्म तत्व परं ग्रही।
विधि मानस भूतिश्च श्री भृगु शरण मम।। 
हसौं  हंसः परं ब्रह्म योगिनां योगचितप्रभुः।
रघूणां सुप्रकाशी च श्री भृगु शरणं मम।। 
शिवाज विष्णु नामीशो दृष्टा तेषां च संस्थितिम्ः।
कमलाजः कमलाशापः श्री भृगु शरणं मम।। 
सर्व साक्षी सर्वमार्गी सर्वशास्त्र प्रवर्तकः।
सर्वेभ्यः सुखदाता च श्री भृगु शरणं मम।। 
सच्चिदानन्द रूपश्च सत्कला सुप्रवर्धनः।
सर्वनामी सर्व सौम्यः श्री भृगु शरणं मम।। 

आज का दिन



पूर्ण कार्यक्रम सूची

श्री त्रिमूर्तिधाम - परिचय

'हरी अवतार हेतु जेहि होई, इदमित्थम कही जाये न सोई'

श्री हरी - श्री विष्णु - श्री परमात्मा के अवतार का यह कारण है कि वह कारण है, ऐसा निश्चय पूर्वक कोई नहीं कह सकता, फिर भी -

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। 
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥

श्री मदभवद्गीता ४/६-७ के अनुसार श्री परमात्मा के कारण में धर्म का विनाश आदि भी एक कारण है। वे लीला करने के लिए पधारते हैं व भक्तों को परमानन्द का दान करने के लिए, उनका दुःख संकट निवारण कर उन्हें सुख प्रदान करने के लिए ही वे जगत में बार बार अवतार लेते हैं|

श्री त्रिमूर्तिधाम - मुख्य कार्यक्रम

पर्व श्री वसन्तोत्सव

मार्च
शुक्रवार
2
बालाजी अर्चन प्रातः 7 बजे |
श्री कीर्तन प्रातः 8 बजे |
श्री वसन्तोत्सव प्रातः 9 बजे |
श्री सहभोज संगव 11:30 बजे

नए लेख

  • संग्रह

    नामावली स्तुति चालीसा आरती मन्त्र स्तोत्र
  • आदित्य के प्रातः स्मरणीय द्वादश नाम

    ॐ आदित्याय नमः ॐ दिवाकराय नमः ॐ भास्कराय नमः ॐ प्रभाकराय नमः ॐ सहस्रांशुवे नमः ॐ त्रैलोक्यलोचनाय नमः ॐ दिनकराय नमः ॐ द्वादशात्मकाय नमः ॐ त्रयोमूर्तये नमः ॐ सूर्याय नमः ॐ हरिदश्वाय नमः ॐ विभावसवे नमः
  • श्री हनुमान जी के 108 नाम

    1. ॐ अक्षहन्त्रे नमः 2. ॐ अजराय नमः 3. ॐ अनघाय नमः 4. ॐ अनन्तमंगलाय नमः 5. ॐ अनन्ताय नमः
  • श्री शंकर जी के 108 नाम

     1. ॐ अगोचराय नमः 2. ॐ अमरेश्वराय नमः 3. ॐ स्थिराय नमः 4. ॐ स्थानवे नमः 5. ॐ प्रभवे नमः
  • श्री विष्णु जी के 108 नाम

    1. ॐ शान्तिप्रदाय नमः  2. ॐ अच्युत्ताय नमः 3. ॐ अजिताय नमः 4. ॐ अधोक्षजाय नमः 5. ॐ अनन्ताय नमः
  • महर्षि भृगु जी के 108 नाम

    1. ॐ ज्येष्ठाय नमः 2. ॐ अगणित रूपाय नमः 3. ॐ अग्नये नमः 4. ॐ अग्रजाय नमः 5. ॐ अच्युताय नमः
  • श्री गणेश जी के 108 नाम

    1. ॐ गणेशाय नमः 2. ॐ गणनाथाय नमः  3. ॐ भक्तिप्रियाय नमः  4. ॐ गणानां पतये नमः  5. ॐ देवेश्वराय नमः 
  • ज्योतिर्लिंग एवं शिवलिंग - श्री त्रिमूर्तिधाम में 

    1. श्री अमरेश्वर (स्वम्भू) 2. श्री रौद्रशिव  3. श्री सोमनाथ महादेव 4. श्री मल्लिकार्जुन
  • श्री दुर्गाशप्तशती - दुर्गा नामावली

    श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र || श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनामावली  1. ॐ सती 2. साध्वी  3. भवप्रीता  4. भवानी 5. भवमोचनी 6. आर्या
  • श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग नाम

    1 श्री सोमनाथ महादेव 2 श्री मल्लिकार्जुन 3 श्री महाकाल 4 श्री ॐकारेश्वर 5 श्री वैद्यनाथ
  • श्री हनुमान जी के द्वादश नाम

    (इनका स्मरण करने से दुःख - द्वन्द दूर रहते हैं।) 1. श्री हनुमते नमः  2. श्री अंजनिसुताय नमः  3. श्री वायुपुत्राय नमः  4. श्री महाबलाय नमः  5. श्री रामेष्टाय नमः 
  • श्री हनुमान वन्दना

    अतुलित बलधामं हेमशैलाभ देहं‚ दनुजवन कृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकल गुण निधानं वानरानामधीशं‚ रघुपति प्रिय भक्तं वातजातं नमामी।।
  • श्री राम जी की स्तुति

    श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं । नवकञ्ज लोचन कंजमुख करकञ्ज पद कंजारुणं ।। कंदर्प अगणित अमित छवि नवनील-नीरज-सुंदरम । पटपीत मानहूँ तड़ित रुचि शुचि नौमि जनकसुतावरम् ।।  भजु दीनबंधु दिनेश दानव - दैत्यवंश - निकन्दनं । 
  • श्री हनुमान जी की स्तुति

    नमो केसरी पूत महावीर वीरं, मंङ्गलागार रणरङ्गधीरं। कपिवेष महेष वीरेश धीरं, नमो राम दूतं स्वयं रघुवीरं। नमो अञ्जनानंदनं धीर वेषं, नमो सुखदाता हर्ता क्लेशं।
  • श्री बालाजी की स्तुति (संसार के पालन हार हो तुम)

    संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे‚ हम सबके प्राण आधार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे। संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे। 
  • संकट मोचन हनुमानाष्टक 

    (हनुमान चालीसा के पाठ के बाद अवश्य ही एक पाठ तो करें ही करें।)   बाल समय रविभक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो। ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥ देवन आनि करी बिनती तब, छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो॥१॥  

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