श्री त्रिमूर्तिधाम बालाजी हनुमान मंदिर

  • शरीर पीड़ा, रोग भय, शत्रु पीड़ा को नाश करने के लिए श्री बाला जी को नींबू की माला (108 नींबू) भेंट करनी चाहिए। 
  • सुख प्राप्ति के हेतु द्राक्षा (108 द्राक्षा) की माला भेंट करनी चाहिए। 

  • जिनके घर में वास्तुदोष है, वे क्रूर्मावतार का पूजन करें।
  • जिन्होंने विदेश भ्रमण में जाना है, काम नहीं होता, वे मत्स्यावतार का पूजन करें।
  • जिनके भूमि के क्रय विक्रय के कार्य हैं, वे वराह देव का पूजन करें।

  • देव पूजन करने से पूर्व स्नान कर शुद्ध होना एवं शुद्ध वस्त्र धरण करना तो होता ही है, पर शिव पूजन करने वाले को सिले हुए वस्त्र पहने हुए नहीं होना चाहिए। पुरूषों के लिए लाँग वाली धोती पहने हुए होना बहुत ही अच्छा है।
  • आसन, जिस पर बैठें, शुद्ध होना चाहिए।
  • पूजा के समय पूर्व या उत्तर मुख बैठना और पूजन का संकल्प करना बहुत ही श्रेष्ठ है।
  • भस्म, त्रिपुण्ड और रूद्राक्ष माला पूजक के शरीर पर विशेष तौर पर होना चाहिए।
  • भगवान शंकर की पूजा में किसी प्रकार का चम्पा पुष्प नहीं चढ़ाया जाता है।
  • भगवान शिव के चरणों में पुष्प चढ़ाये जाने चाहिए, न कि शिवलिंग के ऊपर। पुष्प माला शिवलिंग को पहनाई जा सकती है।

मुख्य समाचार

पर्व:- श्री प्रेतराज जयन्ती

03 फरवरी 2017

पर्व श्री प्रेतराज जयन्ती, श्री त्रिमूर्तिधाम में 2 फरवरी को बड़ी हर्षोलास के साथ मनाया गया। 


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